
Last Updated:
Bollywood movies on same story Line : वैसे तो बॉलीवुड में नई थीम, नए सब्जेक्ट पर फिल्में बनाने का चलन है. फिल्मों में नयापान ही दर्शकों को सिनेमाघरों तक लाने में मदद करता है. नए पैटर्न का म्यूजिक, नई कहानी, नया सब्जेक्ट जितना नया रुचिकर होगा, मूवी के बॉक्स ऑफिस में अच्छा प्रदर्शन करने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी. दिलचस्प बात यह है कि कुछ कहानियां कभी भी पुरानी नहीं होतीं. हर बार उसमें मामूली फेरबदल करके नई फिल्म बनाई. मजेदार बात यह है कि एक ही थीम पर बनी ऐसी ही चार फिल्में हर बार ब्लॉकबस्टर साबित हुईं. एक मूवी ने तो वर्ल्ड रिकॉर्ड ही बना दिया. ये चारों फिल्मों 37 साल के अंतराल में बनीं.
हर प्रोड्यूसर को अच्छी कहानी की तलाश होती है. मसाला फिल्म बनाने केलिए इमोशन-एक्शन और रोमांस का तड़का जरूरी होता है. कुछ कहानियां ऐसी होती है जिन्हें समय भी अपने बंधन में नहीं बांध पाता. स्क्रिप्ट राइटर इन कहानियों में समय के साथ बदलाव करते हैं लेकिन मूल आत्मा को ज्यों का त्यों रखते हैं. भारतीय संस्कृति जीवन की आत्मा है. 37 साल के अंतराल में सिनेमाघरों में एक ही थीम पर बेस्ड चार फिल्में आईं. चारों फिल्मों की कहानी सेम थी. यानी एक ही कहानी चार फिल्मों में नजर आई. इन चार फिल्मों में से तीन सुपरहिट जबकि एक मूवी ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर रही. ये चार फिल्में पूरब और पश्चिम, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, परदेस, और नमस्ते लंदन थीं.
सबसे पहले बात करते हैं 1970 में रिलीज हुई फिल्म ‘पूरब और पश्चिम’ की. मनोज कुमार, सायरा बानो और प्रेम चोपड़ा लीड रोल में थे. इसके अलावा अशोक कुमार, निरूपा रॉय, कामिनी कौशल, भारती, विनोद खन्ना और प्राण सहायक भूमिकाओं में थे. मनोज कुमार को इस फिल्म को बनाने का आइडिया उनकी पत्नी शशि ने दिया था. दरअसल, मनोज कुमार जब लाहौर से दिल्ली आए तो उन्हें रह-रहकर अपने शहर की आती थी. जब मुंबई आ गए तो दिल्ली काा मीठी यादें उन्हें सताने लगीं. ऐसे में उनकी पत्नी शशि गोस्वामी ने उन्हें एक फिल्म बनाने को कहा था. पहले फिल्म का टाइटल ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ रखा जाना था लेकिन मनोज कुमार ने यह टाइटल देवानंद को दे दिया. ‘पूरब और पश्चिम’ फिल्म का टाइटल दो हिस्सों में था. 15 मिनट तक फिल्म निकलने के बाद फिल्म का आधा टाइटल सामने आता है. फिर आधे घंटे बाद फिल्म के टाइटल का दूसरा हिस्सा देखने को मिलता है.
पूरब और पश्चिम फिल्म का म्यूजिक कल्याण जी आनंद जी का था. फिल्म के पॉप्युलर गानों में’कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे’, पूर्वा सुहानी आई रे, ट्विंकल-ट्विकल लिटिल स्टार, ‘भारत का रहने वाला हूं’ सॉन्ग शामिल थे. फिल्म में ‘ओम जय जगदीश हरे’ आरती, ‘रघुपति राघव राजाराम’ भजन सबकुछ था. फिल्म देखते समय सिनेमाघरों में मंदिर की फीलिंग आती थी. फिल्म के जरिये मनोज कुमार ने पश्चिम संस्कृति के खोखलापन को दिखाया. दिल छू लेने वाली कहानी के जरिये उन्होंने बताया था कि पश्चिम में लालच-वासना-भ्रष्टाचार है जबकि भारत में प्यार-सम्मान-सदाचार-सच्चाई है. इस फिल्म का इतना ज्यादा इंपैक्ट हुआ कि कई भारतीय विदेश से नौकरी छोड़कर वापस लौट आए. मूवी 1970 की चौथी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी थी. फिल्म ने भारत में 2.7 करोड़ का कलेक्शन किया था. ‘पूरब और पश्चिम’ हिंदी सिनेमा की कालजयी फिल्म कही जाती है. दरअसल, आरती-भजन, भारतीय संस्कृति का बखान, प्यार-सदभाव, पूर्व और पश्चिम संस्कृति के भेद को आधार बनाकर बॉलीवुड में आगे चलकर तीन और फिल्में बनाई गईं. तीनों ही बॉक्स ऑफिस पर छा गईं.
Add News18 as
Preferred Source on Google
‘पूरब और पश्चिम’ फिल्म के रिलीज होने के 25 साल बाद 20 अक्टूबर 1995 को एक और फिल्म आई जिसकी थीम सेम थी. फिल्म का नाम ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ था जिसमें भारतीय संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों की खुशबू समाई हुई थी. शाहरुख खान-काजोल और अमरीश पुरी लीड रोल में थे. प्रोड्यूसर यश चोपड़ा के बेटे आदित्य चोपड़ा ने ही स्टोरी और स्क्रीनप्ले लिखा था. यह उनकी पहली फिल्म थी. म्यूजिक जतिन-ललित ने दिया था. फिल्म का संगीत साल 1995 का बेस्ट सेलिंग म्यूजिक रहा था. फिल्म में कुल 7 गाने रखे गए थे. हर गाना सुपरहिट था. आज भी इन गानों को लोग शादी-पार्टी में गुनगुनाते हैं. फिल्म के सबसे फेवरेट गाने ‘तुझे देखा तो ये जाना सनम’ का मुखड़ा भी आदित्य चोपड़ा ने ही लिखा था. फिल्म का हर सीन-डायलॉग कालजयी साबित हुआ.
सिर्फ 4 करोड़ के बजट में बनी डीडीएलजे ने 103 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी. यह बॉलीवुड की सबसे बेस्ट फिल्मों में से एक है. डीडीएलजे ने एक नेशनल अवॉर्ड और 10 फिल्मफेयर अवॉर्ड समेत कुल 15 अवॉर्ड मिले थे. डीडीएलजे ने उस समय सभी बॉलीवुड फिल्मों का रिकॉर्ड तोड़ दिया था. इसी फिल्म ने शाहरुख खान-काजोल को सुपरस्टार बनाया. कहा जाता है कि हर शख्स को जिंदगी में एक बार यह मूवी जरूर देखनी चाहिए. इसके बिना हिंदी सिनेमा अधूरा है. सिनेमाघरों में सबसे ज्यादा दिन चलने का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी डीडीएलजे के नाम है.
यह भी दिलचस्प है कि 1995 में जहां एक ओर शाहरुख खान काजोल की मूवी ‘डीडीएलजे’ ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर रहीं, वहीं इसी साल शाहरुख खान-जैकी श्रॉफ और अनिल कपूर की एक और फिल्म ‘त्रिमूर्ति’ डिजास्टर साबित हुई. फिल्म फ्लॉप हो जाने के बाद सुभाष घई ने शाहरुख खान के साथ एक और फिल्म बनाने पर विचार किया. लो बजट मूवी की यह फिल्म ‘परदेस’ थी. ‘परदेस’ मूवी में भी भारतीय और पश्चिमी संस्कृति के अंतर को बखूबी दिखाया गया. शाहरुख खान-महिमा चौधरी स्टारर इस फिल्म में म्यूजिक नदीम-श्रवण का था. म्यूजिक सुपरहिट था. फिल्म में अमरीश पुरी, आलोक नाथ, दीना पाठक और हिमानी शिवपुरी ने भी अहम रोल निभाया था.
‘परदेस’ की कहानी में शाहरुख खान ने अर्जुन नाम के लड़के का रोल निभाया है जो विदेश में रहता जरूर है, पर अपने देश की संस्कृति पर विश्वास करता है. फिल्म के दो गानों ‘यह दिल दीवाना’ और ‘मेरी महबूबा’ ने धूम मचा दी थी. सबसे दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के म्यूजिक लॉन्च के मौके पर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी भी पहुंचे थे. 8 करोड़ी फिल्म ने 40 करोड़ रुपये का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था.
आगे चलकर 2007 में इसी कहानी पर एक और फिल्म ‘नमस्ते लंदन’ बनाई गई. अक्षय कुमार-कैटरीना कैफ लीड रोल में थे. यह एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म थी जिसका निर्देशन और प्रोडक्शन विपुल अमृतलाल शाह ने किया था. फिल्म में ऋषि कपूर नीना वाडिया, जावेद शेख, उपेन पटेल और क्लाइव स्टैंडन सपोर्टिंग रोल में थे. कहानी अक्षय कुमार के एक दोस्त की रियल लाइफ से इंस्पायर्ड थी. नमस्ते लंदन में दो संस्कृतियों के बीच टकराव दिखाया गया. भारतीय संस्कृति पूरी दुनिया में सबसे अच्छी है.
नमस्ते लंदन फिल्म की शूटिंग 16 अगस्त 2006 में शुरू हुई थी. एक साल के अंदर शूटिंग कंप्लीट हुई थी. म्यूजिक हिमेश रेशमिया ने कंपोज किया था. स्क्रीनप्ले-डायलॉग-स्टोरी समीर नैयर ने लिखी थी. गीतकार जावेद अख्तर थे. 31 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 71 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. मूवी बॉक्स ऑफिस पर सेमी हिट साबित हुई थी. यह फिल्म एक बंगाली फिल्म का अनाधिकारिक रूप से रीमेक थी.


