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प्यार एक सुखद अहसास है. प्यार को दिल से महसूस किया जाता है. प्यार के फूल जब दिल में खिलते हैं तो इजहार के लिए अल्फाज चाहिए होते हैं. दिल की बात जुबां पर गानों के जरिये ही आती है. यह भी सच है कि पहला प्यार हमेशा अधूरा रह जाता है. प्यार में मिले दर्द को जब पर्दे पर हीरो बयां करते हैं तो दर्शकों को ऐसा लगता है कि जैसे वो दर्द उनका ही है. 48 साल पहले एक ऐसी फिल्म आई थी जिसमें प्यार की तड़प थी. अधूरी मुहब्बत की दास्तान, दिल टूटने का दर्द सबकुछ इसमें था. इसी फिल्म का एक दर्दभरा गाना दो सिंगर ने गाया था. दिलचस्प बात यह है कि दोनों सिंगर को फिल्मफेयर नॉमिनेशन मिला था. गाना आज भी टूटे दिल आशिकों के दिल में बसता है.
‘तेरे चेहरे से नजर नहीं हटती, नजारे हम क्या देखें’ ‘कह दूं तुम्हें, या चुप रहूं, दिल में मेरे आज क्या है’, ‘मैं तेरे इश्क में मर ना जाऊं कहीं, तू मुझे आजमाने की कोशिश ना कर’ या फिर ‘ओ साथी रे, तेरे बिना भी क्या जीना’ जैसे गाने आशिकों की जुबान पर आ ही जाते हैं. पहले प्यार में जब दिल टूटता है तो दर्दभरे गाने ही मरहम का काम करते हैं. 60-70 के ऐसे कितने गाने हैं जो आज भी टूटे दिल आशिकों के दिल में बसते हैं. 1978 में ऐसी ही एक फिल्म आई थी जिसका गाना 48 साल बाद भी आशिकों की पहली पसंद बना हुआ है. दिलचस्प बात यह है कि इस गाने के दो अलग-अलग सिंगर ने गाया. दोनों सिंगर को फिल्मफेयर नॉमिनेशन मिला. वो फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं…….
साल था 1976. बॉलीवुड के मशहूर विलेन प्रेम चोपड़ा के भाई कैलाश चोपड़ा एक फिल्म ‘देवदास’ बनाना चाहते थे. उन्होंने प्रकाश मेहरा को बतौर डायरेक्टर साइन कर लिया. प्रकाश मेहरा को कहानी को मॉडर्न तरीके से बनाना चाहते थे लेकिन मेकर्स तैयार नहीं हुए. ऐसे में यह फिल्म बंद हो गई. प्रकाश मेहरा ने ‘देवदास’ की कहानी को अपने ही अंदाज में लिखा. उन्होंने राखी को एक पारो का एक नया रूप दिया. रेखा को चद्रमुखी बना दिया और नाम दिया ‘जोहरा’. कहानी के हीरो का नाम ‘देवदास’ की जगह ‘सिकंदर’ कर दिया. फिल्म का टाइटल ‘मुकद्दर का सिकंदर’ रखा.
27 अक्टूबर 1978 को रिलीज हुई ‘मुकद्दर का सिकंदर’ फिल्म में अमिताभ बच्चन, रेखा , विनोद खन्ना, राखी लीड रोल में थे. फिल्म की स्टोरी विजयकांत शर्मा, स्क्रीनप्ले विजय कौल और डायलॉग कादर खान ने लिखे थे. म्यूजिक कल्याणजी – आनंद जी ने दिया था. गीतकार अनजान-प्रकाश मेहरा थे. प्रकाश मेहरा ने फिल्म का एक गाना ‘सलाम-ए-इश्क, मेरी जां, जरा कुबूल कर लो’ लिखा था जिसे किशोर कुमार-लता मंगेशकर ने गाया था. गाना यमन कल्याण राग पर बेस्ड था.
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‘मुकद्दर का सिकंदर’ फिल्म में कुल 6 गाने थे. दो गाने ‘ओ साथे रे’ और ‘मुकद्दर का सिकंदर’ के दो-दो वर्जन फिल्म में रखे गए थे.
दिलचस्प बात यह है कि ‘ओ साथी रे’ को एक बार किशोर कुमार और दूसरी बार आशा भोसले ने गाया था. ‘ओ साथी रे’ गाना फिल्म की शुरुआत में राखी पर फिल्माया जाता है. वो राखी जो अपने बर्थडे पर यह गाना गाती हैं और अमिताभ बच्चन उन्हें गुड़िया देने के लिए जाते हैं.
‘ओ साथी रे’ गाना दूसरी बार अमिताभ बच्चन गाते हैं, वो भी स्टेज से. इस बार यह गाना किशोर कुमार की आवाज में सुनाई देता है. दोनों ही गानों को फिल्मफेयर में नॉमिनेशन भी मिला. यह गाना आज भी टूटे दिल आशिकी के दिल की पहली पसंद है.
‘ओ साथी रे’ गाना शुरू होने से पहले अमिताभ बच्चन स्टेज पर अपनी जिंदगी की कहानी सुनाते हैं. वो सीन 16 पेज का था. कादर खान ने लिखा था. जब अमिताभ बच्चन ने 16 पेज का सीन देखा तो वो चौंक गए. वो बोले कि इतना लंबा सीन मैं नहीं कर पाऊंगा. कादर खान को बुलाया गया. अमिताभ ने उनसे कहा कि आपने तो पूरी किताब लिख दी है. कादर खान ने पूरा सीन सुनाया. अमिताभ ने उसे रिकॉर्ड कर लिया. यही सीन इतिहास बन गया.
फिल्म दिखाती है कि किसी को भी सच्चा प्यार नसीब नहीं होता. अमजद खान रेखा से एकतरफा प्यार करते हैं. रेखा तन-मन से अमिताभ बच्चन पर फिदा हैं. अमिताभ बचपन की बचपन की फ्रेंड राखी से दिल ही दिल में प्यार करते हैं लेकिन इजहार नहीं कर पाते. वहीं राखी विनोद खन्ना को दिल दे बैठती हैं.
‘मुकद्दर का सिकंदर’ का बजट करीब 1 करोड़ था. मूवी ने 8.5 करोड़ का कलेक्शन किया था. मूवी बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. 1978 में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.


