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साल 1993 में आई एक फिल्म ने भारतीय सिनेमा में कोर्टरूम ड्रामा की परिभाषा ही बदल दी. मूवी के दमदार डायलॉग्स आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं. फिल्म ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाया, बल्कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की एक नई मिसाल पेश की. एक साधारण महिला के इंसाफ की लड़ाई और एक वकील के गरजते अंदाज ने दर्शकों को सिनेमाघरों में तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया था.

नई दिल्ली. बॉलीवुड के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर कमाई नहीं करतीं, बल्कि दर्शकों के दिलो-दिमाग पर अपनी छाप छोड़ देती हैं. साल 1993 में एक ऐसी ही फिल्म रिलीज हुई थी, जिसने न्याय व्यवस्था की कमियों पर कड़ा प्रहार किया था और साथ ही हर किसी के दिल में बस गई.

फिल्म का नाम सुनते ही सबसे पहले एक वकील का वो गुस्सा याद आता है जो अन्याय के खिलाफ दहाड़ता है. फिल्म की लीड हीरोइन ने अपनी मर्यादा की परवाह किए बिना सच का साथ दिया, जिसके लिए उसे घर तक छोड़ना पड़ा. हम जिस फिल्म की बात कर रहे हैं उसका नाम है दामिनी. इस कल्ट क्लासिक फिल्म ने सिनेमाघरों में तालियों की गड़गड़ाहट पैदा कर दी थी.

मीनाक्षी शेषाद्रि इस फिल्म की जान रहीं. उन्होंने एक सशक्त और जुझारू महिला का किरदार निभाया. सनी देओल ने वकील गोविंद के रूप में फिल्म का पूरा रुख ही बदल दिया. हालांकि उनकी एंट्री इंटरवल के बाद होती है, लेकिन उनके डायलॉग्स आज भी कल्ट माने जाते हैं.
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ऋषि कपूर ने एक ऐसे पति की भूमिका निभाई जो अपनी पत्नी और परिवार के बीच फंसा हुआ है. वहीं, अमरीश पुरी ने एडवोकेट चड्ढा के किरदार में एक चालाक और भ्रष्ट वकील का किरदार ऐसा निभाया कि लोग उनसे नफरत करने लगे. फिल्म की सफलता की वजह इसकी दमदार स्टारकास्ट भी रही.

फिल्म की कहानी है दामिनी नाम की महिला की है जो एक संपन्न परिवार में ब्याह कर आती है, लेकिन उसकी खुशियां तब मातम में बदल जाती हैं जब वह अपने ही देवर को अपने घर की नौकरानी के साथ दुष्कर्म करते हुए देख लेती है. समाज और परिवार के दबाव के बावजूद वह सच का साथ देने का फैसला करती है.

जब उसका अपना ससुराल उसे पागल घोषित कर देता है, तब उसकी मुलाकात एक वकील गोविंद से होती है जो खुद अपनी जिंदगी की लड़ाई हार चुका है, लेकिन इस केस के लिए वह फिर से काला कोट पहनता है, क्लाइमैक्स में जिस तरह से सच्चाई की जीत होती है, वह आज भी रोंगटे खड़े कर देता है.

इस फिल्म के डायलॉग्स ने ही इसे अमर बनाया है. सनी देओल का ‘तारीख पर तारीख’ और ‘ये ढाई किलो का हाथ जब किसी पर पड़ता है ना तो आदमी उठता नहीं, उठ जाता है’, आज भी मीम्स की दुनिया में छाए रहते हैं. ‘चिल्लाओ मत वरना ये केस यहीं रफा-दफा कर दूंगा’ जैसे डायलॉग्स पर थिएटर्स में जमकर सीटी और तालियां बजी थी.

साल 1993 की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक ‘दामिनी’ ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था. उस दौर में महज 2.5 करोड़ में बनी इस फिल्म ने 11 करोड़ रुपये का बिजनेस किया था, जो आज के हिसाब से 100 करोड़ से भी कहीं अधिक है. यह साल की छठी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी थी. दर्शकों ने इस मूवी को इसे सिर आंखों पर बिठा लिया था.

राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी फिल्म दामिनी बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन कल्ट क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है. सनी देओल को उनकी दमदार एक्टिंग के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला. उन्होंने बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी अपने नाम कर लिया था. वहीं, राजकुमार संतोषी ने बेस्ट डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता था.


