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90 के दशक में जब भी कोई प्रेम गीत गूंजता तो उसके पीछे अक्सर एक ही नाम होता समीर अंजान. ‘देखा है पहली बार’, ‘नजर के सामने’, ‘अब तेरे बिन जी लेंगे हम’ जैसे अमर गीतों के रचयिता समीर ने बॉलीवुड को प्यार के मायने सिखाए, लेकिन क्या आप जानते हैं उनके हर रोमांटिक गीत के पीछे एक टूटी हुई कहानी है? एक ऐसा दर्द जिसने उनकी कलम को जीवन दे दिया. यहां है बात उस 17 साल के अधूरे प्यार की, जिसे उन्होंने अपनी सुहागरात की रात अपनी पत्नी के सामने कबूल किया.
नई दिल्ली. जिये तो जिये कैसे बिन आपके’, ‘ऐसी दीवानगी देखी नहीं’, ‘घूंघट की आड़ से दिलबर का’, ‘हम प्यार हैं तुम्हारे दिलदार हैं तुम्हारे’ और ‘प्यार के कागज पर दिल की कलम से’ जैसे कालजयी और रूह को छू लेने वाले गीतों से करोड़ों दिलों की धड़कन बनने वाले मशहूर गीतकार समीर अंजान ने दुनिया को मोहब्बत करना सिखाया. उनके लिखे गानों को सुनकर न जाने कितने प्रेमियों ने अपनी मोहब्बत का इजहार किया होगा और न जाने कितने टूटे दिलों ने अपने आंसू बहाए होंगे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया को रोमांस और विरह के गीतों से सराबोर करने वाले समीर अंजान की अपनी जिंदगी के पन्नों में मोहब्बत का एक ऐसा गहरा, दर्दनाक और खौफनाक पन्ना छिपा है, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए. 17 साल का वो अधूरा प्यार जिसे वह अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी ‘ट्रैजेडी’ मानते हैं.
कुछ कहानियां सिर्फ गाने नहीं बनातीं, वे खुद एक अधूरी मोहब्बत का दर्द बन जाती हैं… जो शब्दों में ढलकर भी दिल के किसी कोने में हमेशा जिंदा रहती हैं. ऐसी ही एक अनकही और बेहद भावुक दास्तां मशहूर गीतकार समीर अंजान ने सुनाई, जिसने हर किसी को भीतर तक हिला दिया. फिल्मफेयर के दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने उस 17 साल पुराने प्यार की कहानी साझा की, जो बचपन की मासूम दोस्ती से शुरू होकर एक गहरे लेकिन अधूरे रिश्ते में बदल गई. उन्होंने बताया कि कैसे एक लड़की, जिसके साथ वे बचपन से जुड़े थे, उनके जीवन का सबसे अहम हिस्सा बन गई, लेकिन किस्मत ने दोनों को अलग रास्तों पर ला खड़ा किया. सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब उन्होंने कहा कि यह कहानी उन्होंने अपनी पत्नी को शादी की पहली रात यानी सुहागरात पर बताई थी, ताकिकुछ कहानियां सिर्फ गाने नहीं बनातीं, वे खुद एक अधूरी मोहब्बत का दर्द बन जाती हैं… जो शब्दों में ढलकर भी दिल के किसी कोने में हमेशा जिंदा रहती हैं. ऐसी ही एक अनकही और बेहद भावुक दास्तां मशहूर गीतकार समीर अंजान ने सुनाई, जिसने हर किसी को भीतर तक हिला दिया. फिल्मफेयर के दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने उस 17 साल पुराने प्यार की कहानी साझा की, जो बचपन की मासूम दोस्ती से शुरू होकर एक गहरे लेकिन अधूरे रिश्ते में बदल गई. उन्होंने बताया कि कैसे एक लड़की, जिसके साथ वे बचपन से जुड़े थे, उनके जीवन का सबसे अहम हिस्सा बन गई, लेकिन किस्मत ने दोनों को अलग रास्तों पर ला खड़ा किया. सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब उन्होंने कहा कि यह कहानी उन्होंने अपनी पत्नी को शादी की पहली रात यानी सुहागरात पर बताई थी, ताकि कोई बात उनसे छिपी न रहे. कोई बात उनसे छिपी न रहे.
समीर अंजान की इस अधूरी प्रेम कहानी की शुरुआत बचपन के दिनों से की. उन्होंने बताया कि वे दोनों चौथी-पांचवीं क्लास पढ़ते होंगे. बचपन का वो साथ कब धीरे-धीरे पाकीजा मोहब्बत में बदल गया, दोनों को पता ही नहीं चला. लेकिन यह प्यार का रास्ता फूलों का नहीं, बल्कि जलते अंगारों का था. समीर ने बताया, ‘उस लड़की का भाई उस इलाके का एक बहुत बड़ा और खूंखार क्रिमिनल था’. उन्होंने कहा कि मैं जानता था कि अगर उसके भाई को को भनक भी लग गई तो वो मुझे जान से मार दिया जाएगा, काट दिया जाएगा. लेकिन कहते हैं न कि इश्क कहां डरता है? मैं जानते-बूझते हुए भी उस आग से खेल रहा था.
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उन्होंने आज के दौर के प्यार अपने जमाने के प्यार की तुलना की. उन्होंने कहा कि आज की लव स्टोरीज के उलट, उनका प्यार फिजिकल रिलेशनशिप से बहुत दूर था. वे कहते हैं, ’17 साल के अफेयर में मैंने उस लड़की का सिर्फ एक बार हाथ छुआ था.’ वह कहते हैं वो दिल का कनेक्शन था. मैं आंख बंद करके सोचता कि वह अपनी छत पर दिखे और मुझे देख रही हो तो समझ जाऊंगा हां प्यार है और जब आंखे खोलता तो वह हमेशा सामने होती थी. आज भी जब मैं लिखता हूं तो उसी अहसास को पन्नों पर उतारता हूं.
एक वक्त ऐसा आया जब समीर इस खौफ और दूरी से तंग आ चुके थे. उन्होंने बताया कि मुंबई आने से पहले मैंने अपनी प्रेमिका के सामने एक बड़ा प्रस्ताव रखा. समीर ने बताया, ‘मैंने उससे कहा कि चल, हम दोनों यहां से भाग चलते हैं.’ लेकिन वह एक बेहद समझदार और संस्कारी लड़की थी. उसने मेरी बात मानने से साफ इनकार कर दिया. उसने मुझसे कहा कि नहीं, हमें भागना नहीं है. पहले तुम खुद के पैरों पर खड़े हो जाओ, जीवन में कुछ बन जाओ. मैं तुमसे वादा करती हूं कि मैं सिर्फ तुमसे ही शादी करूंगी और किसी से नहीं.’
समीर उसकी बात मानकर अपनी किस्मत चमकाने और पैरों पर खड़ा होने के लिए मुंबई आ गए. उन्होंने दिन-रात मेहनत की, संघर्ष किया और आखिरकार उन्हें वह सफलता मिल गई, जिसके सपने उन दोनों ने देखे थे. लेकिन किस्मत का क्रूर खेल तो देखिए, जब समीर सफलता का सेहरा बांधकर, अपने पैरों पर खड़े होकर वापस उस शहर लौटे, तो वह लड़की इस दुनिया को ही अलविदा कह चुकी थी. समीर के हाथ आई तो सिर्फ एक अंतहीन खामोशी.
समीर अंजान ने बताया कि उनकी यह कहानी एक बेहद दर्दनाक और ट्रैजेडिक कहानी है. जब उन्होंने फिल्म ‘आशिकी’ का वह मशहूर गाना लिखा था ‘तेरे बिन जी लेंगे हम, जिंदगी का हर गम पी लेंगे हम’ तो वह कोई काल्पनिक पंक्तियां नहीं थीं, बल्कि उनके अपने दिल का लहू था जो कागज पर बह रहा था. समीर जी ने इंटरव्यू में एक बेहद सटीक उदाहरण देते हुए कहा, ‘अक्सर लोग रोमांटिक गाने लिखने वालों से पूछते हैं कि क्या आपने कभी खुद प्यार किया है? यह सवाल ठीक वैसा ही है जैसे किसी पक्के शराबी से पूछा जाए कि क्या तुमने कभी शराब पी है? हमने जो जिंदगी में असलियत में जिया है, जो दर्द महसूस किया है, वही हमारे गानों में निकलकर बाहर आया है.’
17 साल की इस मोहब्बत जिंदगी से दूर हो गई और फिर घरवालों ने शादी तय कर दी. समीर एक साफ दिल के इंसान रह हैं, वे अपनी नई जिंदगी की शुरुआत किसी झूठ या छुपे हुए राज के साथ नहीं करना चाहते थे. समीर ने बताया, ‘शादी के बाद अपनी सुहागरात पर ही मैंने अपनी पत्नी को अपने पास बैठाया और सब कुछ सच-सच बता दिया. मैंने अपनी पत्नी से कहा कि कल को तुम्हें यह बात बाहर के किसी व्यक्ति से या किसी और जरिए से पता चले, उससे पहले मैं खुद तुम्हें सब कुछ बता देना चाहता हूं’
समीर ने अपनी पत्नी को उस 5वीं क्लास से शुरू हुई 17 साल की पूरी लव स्टोरी को विस्तार से सुनाया. उन्होंने अपनी पत्नी को यह भी बताया कि वो आज जहां भी हैं उस लड़की वी वजह से हैं. उस लड़की के जाने के बाद उनकी जिंदगी में कई और लड़कियां आईं, बहुतों ने उनके करीब आने की कोशिश की लेकिन समीर ने कभी किसी की तरफ आंख उठाकर भी नहीं देखा. समीर की इस ईमानदारी को उनकी पत्नी ने भी बेहद सम्मान दिया और यही वजह है कि आज समीर अंजान अपनी शादीशुदा जिंदगी में बेहद खुश हैं, लेकिन उनके दिल के एक कोने में वह 17 साल पुराना अधूरा प्यार आज भी जिंदा है, जो उनके गानों के जरिए दुनिया के सामने आता रहता है.
समीर अंजान ने 80 के दशक के अंत और 90 के दशक में खूब नाम कमाया. उन्होंने अमित कुमार, कुमार सानू, उदित नारायण और अलका याग्निक जैसे गायकों के लिए सैकड़ों हिट गाने लिखे. ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘तेरे बिन’, ‘कहीं तो होगी वो’ आदि उनके सबसे लोकप्रिय गाने हैं. उनके गानों में दर्द, इंतजार, बेवफाई और बिछड़ने का जो एहसास है, वह शायद इसी अधूरी मोहब्बत से आया है. समीर कहते हैं कि आज भी जब वे गाने लिखते हैं तो उस पुराने एहसास को महसूस करते हैं.


