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Bollywood Cult Hit Movie : कुछ फिल्मों की कहानी दिल में लगाव पैदा करती है. दिल में अपनेपन का अहसास कराती हैं. इन फिल्मों की यादें हमेशा के लिए दिल-दिमाग में बस जाती हैं. 1975 के बाद जब अमिताभ बच्चन के सितारे बुलंद थे, स्टारडम का सूरज चमक रहा था, तब तीन ऐसी फिल्में आईं, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा. तीनों फिल्मों की कहानी सरल-सहज होते हुए असाधारण थी. तीनों ही फिल्मों की कहानी समय से आगे की थीं. तीनों इमोशनल फिल्में थीं. तीनों फिल्मों की गिनती आज कल्ट हिट फिल्मों में होती है. बॉक्स ऑफिस पर खूब पैसे भी कमाए.
बॉलीवुड में समय-समय पर छोटे बजट की ऐसी फिल्में आती रही हैं जिनकी कहानी में अपनापन था. नयापन था. कहानी समाज के बहुत बड़े वर्ग से सीधे कनेक्ट थी. कहानी में समाज की सच्चाई थी. हर घर की कहानी को पर्दे पर देखकर हर दर्शक ने जुड़ाव महसूस किया. 1977 में ऐसी ही तीन फिल्में रिलीज हुईं जिन्होंने अमिताभ बच्चन-विनोद खन्ना, धर्मेंद्र जैसे बड़े सितारों की बड़े बजट की फिल्मों के बीच दर्शकों को अपनी ओर खींचा. उनके दिल में जगह बनाई और शानदार कमाई करके चौंका दिया. ये तीन फिल्में थीं : घरौंदा, आदमी सड़क का और दुल्हन वही जो पिया मन भाए. तीनों ही फिल्में आज कल्ट क्लासिक का दर्जा पा चुकी हैं. आइये जानते हैं इन फिल्मों से जुड़े दिलचस्प फैक्ट…….
सबसे पहले बात करते हैं ‘घरौंदा’ फिल्म की जिसके डायरेक्टर-प्रोड्यूसर भीमसेन थे. फिल्म की कहानी डॉ शंकर शेष के एक नाटक पर बेस्ड थी. फिल्म मुंबई जैसे महानगर में रहने वाली मध्यमवर्गीय जीवन की विवशताओं और मानवीय संबंधों के बदलते समीकरणों का एक यथार्थवादी चित्रण करती है. फिल्म का स्क्रीनप्ले-डायलॉग गुलजार और भूषण बनमाली ने लिखे थे. फिल्म में अमोल पालेकर, जरी वहाब, श्रीराम लागू और जलाल आगा जैसे सितारे थे.
म्यूजिक जयदेव ने कंपोज किया था. फिल्म में कुल 3 गाने थे. फिल्म का सबसे यादगार गाना ‘दो दीवाने शहर में, धूप में दोपहर में, आबोदाना ढूंढते हैं, आशियाना ढूंढते हैं’ था. इस कालजयी गाने को भूपिंदर सिंह और रुना लैला ने गाया है. गाने का एक सैड वर्जन भी था. ‘दो दीवाने शहर में’ गाना गीतकार गुलजार ने लिख था. रुना लैला की आवाज में फिल्म में एक रोमांटिक गाना ‘तुम हो या ना हो, मुझे इतना यकीं है’ भी था. गाना बहुत ही मॉडर्न अप्रोच का था. इस गाने को नक्श ल्यालपुरी ने लिखा था.
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फिल्म बहुत अच्छी थी. जरीना वहाब और अमोल पालेकर एक ऑफिस में काम करते हैं, प्यार करते हैं लेकिन शादी नहीं होती. जरीना की शादी एक उसके बॉस डॉ. श्रीराम लागू से होती है. तीनों की एक्टिंग शानदार थी लेकिन बाजी श्रीराम लागू सबसे ज्यादा प्रभावी नजर आए. उन्होंने रोल को इस अंदाज में निभाया कि दर्शक उनसे नफरत नहीं कर पाते बल्कि वो दर्शकों का दिल जीत लेते हैं. श्रीराम लागू को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था. ‘दो दीवाने शहर में’ गाने के लिए गुलजार को बेस्ट लिरिसिस्ट का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. 95 लाख के बजट में बनी ‘घरौंदा’ ने 3.07 करोड़ की कमाई की थी. यह एक हिट फिल्म थी. यह उस साल की 10वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.
इस लिस्ट में दूसरा नाम ‘दुल्हन वही जो पिया मन भाए’ फिल्म का है जिसका डायरेक्शन लेख टंडन ने किया था. फिल्म राजश्री प्रोडक्शन के बैनर तले बनी थी. प्रोड्यूसर ताराचंद बड़जात्या थे. फिल्म में प्रेम किशन-रामेश्वरी लीड रोल में थे. इसके अलावा, मदन पुरी, जगदीप और इफ्तिखार भी अहम भूमिकाओं में थे. स्टोरी-स्क्रीनप्ले मधुसूदन कालेलकर ने लिखा था. डायलॉग राजेंद्र गौड़ ने लिखे थे. चितचोर (1976) के बाद यह राजश्री प्रोडक्शन की दूसरी ऐसी फिल्म थी जो सिनेमास्कोप थी. कहानी 1941 की हॉलीवुड मूवी ‘इट स्टार्टेड विथ ईव’ से इंस्पायर्ड थी. 1952 में देवानंद-मीना कुमारी की फिल्म ‘तमाशा’ भी इसी कहानी पर बेस्ड थी. दादा की तबीयत खराब होने की वजह से पोता अपने घर पर गर्लफ्रेंड की जगह किसी दूसरी लड़की को बहू बनाकर ले आता है. दादाजी लड़की को बहू के रूप में पसंद करने लगते हैं. रामेश्वरी की यह पहली फिल्म थी. प्रेमनाथ के बेटे प्रेम किशन दर्शकों को कुछ खास प्रभावित नहीं कर पाए. यह उनकी दूसरी फिल्म थी.
फिल्म के गीतकार-संगीतकार रविंद्र जैन थे. उनकी मेलोडियस धुनों से सजे गानो ने फिल्म की सफलता में बहुत योगदान दिया. फिल्म में रामायण की चौपाइयां भी थीं. इसके अलावा सबमिलाकर कुल 8 गाने थे. फिल्म का सबसे पॉप्युलर गाना ‘ले तो आए हो मुझे सपनों के गांव में’ था. हेमलता, येसुदास और बनश्री सेनगुप्ता का गाया ‘खुशियां ही खुशियां हों दामन में मेरे’ गाना भी बहुत अच्छा बना था.
लेख टंडन, विजेंद्र गौड़ और मधुसूदन को बेस्ट स्क्रीनप्ले फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. विजेंद्र गौड़ को बेस्ट डायलॉग फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था. 1.02 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 3.67 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी. यह उस साल की 8वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.
इस लिस्ट में तीसरा नाम ‘आदमी सड़क का’ फिल्म का है जिसके डायरेक्टर-प्रोड्यूसर देवेंद्र गोयल थे. फिल्म में शत्रुघ्न सिन्हा, जाहिरा, विक्रम, सुजीत कुमार, देवेन वर्मा, असित सेन, मुमताज बेगम और आगा जैसे सितारे थे. कहानी मुश्ताक जलीली ने लिखी थी. गीतकार वर्मा मलिक थे और संगीत रवि ने कंपोज किया था. यह एक सामजिक फिल्म थी. पिता की मौत के बाद बड़े भाई अपने छोटे भाई और मां के साथ बुरा बर्ताव करते हैं. छोटा भाई अपनी पोजिशन बेहतर करके उनसे बदला लेता है. अंत में पूरा परिवार मिल जाता है और कहानी सुखद मोड़ पर खत्म होती है.
शत्रुघ्न सिन्हा सपोर्टिं रोल में थे लेकिन पूरी फिल्म में छाए रहे. वही फिल्म की बैकबोन थे. फिल्म के सामाजिक ताने-बाने ने कामयाब करने में अहम भूमिका निभाई. गानों ने भी मूवी की सफलता में अहम रोल निभाया. फिल्म का एक गाना ‘आज मेरे यार की शादी है’ आज भी शादी-विवाह में बजता है. गाना मोहम्मद रफी की आवाज में है. यह कालजयी गाना गीतकार वर्मा मलिक ने लिखा है. 1.15 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 3.95 करोड़ की कमाई की थी. यह एक हिट फिल्म साबित हुई थी.


