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हर दौर के सिनेमा की स्टोरी थोड़े बहुत बदलाव के साथ डायरेक्टर-प्रोड्यूसर दर्शकों के सामने परोसते रहते हैं. 61 साल पहले ऐसी ही एक म्यूजिकल रोमांटिक फिल्म आई थी. यह फिल्म गीतकार आनंद बख्शी और सदाबहार अभिनेता शशि कपूर के करियर के लिए टर्निंग प्वॉइंट साबित हुई. फिल्म की कहानी के साथ इसका गीत-संगीत सबसे मजबूत पक्ष था. कहानी समय से आगे की थी. डीडीएलजे जैसा ट्रेन का कालजयी सीन भी इस फिल्म में था. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस मूवी से मिलती-जुलती एक फिल्म पूरे 30 साल सिनेमाघरों में आई. रीमेक ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई.
जिस कहानी को बड़े-बड़े निर्माताओं ने रिजेक्ट कर दिया हो, उसी पर बनी फिल्म अगर इतिहास रच दे तो इसे आप क्या कहेंगे. राइट ब्रज कटयाल ने 1961 में आई फिल्म ‘मेम साहेब’ से बॉलीवुड में अपना करियर शुरू किया था. उन्होंने इस फिल्म के डायलॉग लिखे थे. उन्होंने 1964 में आई फिल्म ‘एक दिन का बादशाह’ की पूरी स्क्रिप्ट लिखी थी. उन्हीं दिनों उनके पास एक और स्क्रिप्ट थी जिसे बड़े प्रोड्यूसर ठुकरा चुके थे. डायरेक्टर सूरज प्रकाश को ब्रज कटयाल की कहानी बहुत पसंद आई. उन्होंने ‘जब जब फूल खिले’ नाम से फिल्म बनाई. मूवी ने रिलीज होते ही इतिहस रच दिया. इस मूवी के रीमेक ने हिंदी सिनेमा के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अपना नाम दर्ज कराया.
‘जब जब फूल खिले’ में शशि कपूर-नंदा लीड रोल में थे. स्टोरी आइडिया का क्रेडिट चेतन खेड़ा को दिया गया था. प्रोड्यूसर चेतन खेड़ा-हिरेन खेड़ा थे. हिरेन खेड़ा राज कपूर के सेक्रेटरी थे. हिरेन खेड़ा ने बतौर प्रोड्यूसर पहली फिल्म ‘मेहंदी लगी मेरे हाथ’ बनाई थी. इसके डायरेक्टर भी सूरज प्रकाश थे. बात शशि कपूर की करें तो उन्होंने बतौर हीरो ‘चार दीवारी’ से करियर शुरू किया था. नंदा उन दिनों स्टार एक्ट्रेस थीं. फिर भी उन्होंने नए नवेले हीरो शशि कपूर के साथ फिल्म की. शशि कपूर-नंदा की जोड़ी दर्शकों को खूब पसंद आई. दोनों ने 8 फिल्मों में काम किया.
नाविक का किरदार निभाने के लिए लिए शशि कपूर शूटिंग से पहले कश्मीर पहुंचे. वहां पर नाविकों के साथ समय बिताया. उनके हाव-भाव, बात करने का ढंग सीखा. नाव चलाने की प्रैक्टिस की. नंदा ने इस फिल्म के लिए पहली बार अपना लुक चेंज किया. उन्होंने वेस्टर्न ड्रेस पहनी. मॉडर्न लुक अपनाया. कॉस्ट्यूम-मेकअप और हेयर स्टाइल चेंज किया. इसी फिल्म में जतिन खन्ना ने काम किया था, जिनसे नंदा की शादी तय होती है. मजेदार बात यह है कि उन्हीं दिनों बॉलीवुड में एक और जतिन खन्ना अपना करियर शुरु कर रहे थे. उन्होंने अपना नाम बदलकर राजेश खन्ना कर लिया. वही बॉलीवुड के पहले सुपर स्टार बने.
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‘जब जब फूल खिले’ के क्लाइमैक्स से डायरेक्टर सूरज प्रकाश खुश नहीं थे. उन्हीं दिनों उन्होंने एक अमेरिकन फिल्म ‘लव इन द ऑफ्टरनून’ देखी. इसी फिल्म का क्लाइमैक्स उन्होंने अपनी फिल्म में रखा. कुछ ऐसा ही ट्रेन सीन ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ में देखने को मिला था. ‘जब-जब फूल खिले’ में भी लास्ट सीन में नंदा सबकुछ छोड़कर शशि कपूर के साथ ट्रेन में चली जाती है. चलती ट्रेन में नंदा प्लेटफॉर्म पर अपने दिल की बात कहती हैं. फिर दौड़ने लगती हैं और अंत में शशि कपूर उनका हाथ पकड़कर अपनी ओर खींच लेते हैं.
‘जब-जब फूल खिले’ 100 हफ्ते भी ज्यादा चली और गोल्डन जुबली साबित हुई. फिल्म को इतना ज्यादा कामयाब बनाने में इसके सदाबहार सुपरहिट म्यूजिक का बहुत बड़ा हाथ था. म्यूजिक कल्याण जी-आनंद जी ने कंपोज किया था. फिल्म के गाने आज भी सुने जाते हैं. कुल 7 गाने थे. ‘परदेसियों से ना अखियां मिलाना’ गाने के तीन वर्जन थे. 5 रफी साहब के सोलो सॉन्ग थे. हैप्पी-सैड वर्शन रफी साहब ने आए. एक वर्जन लता मंगेशकर ने गाया था.
फिल्म का एक और गाना ‘ये समा, समा है ये प्यार का’ लता की आवाज में था. फिल्म के एक और गाने ‘यहां मैं अजनबी हूं’ में आनंद बख्शी ने अपनी जिंदगी के संघर्ष और दर्द को बयां किया था. ‘ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे’ गाना रफी-सुमन कल्याणपुर की आवाज में था. इस फिल्म के गाने गीतकार आनंद बख्शी के करियर के लिए टर्निंग प्वॉइंट साबित हुए.
बॉक्स ऑफिस इंडिया के पेज के मुताबिक ‘जब जब फूल खिले’ फिल्म 1965 की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली मूवी थी. बजट की कोई सटीक जानकारी तो नहीं है लेकिन फिल्म का कलेक्शन 2.75 करोड़ रुपये था. मूवी बॉक्स ऑफिस पर ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. इस फिल्म ने शशि कपूर को कामयाब हीरो बना दिया. आगे चलकर वो कपूर खानदान के सबसे सफल हीरो बने.
1996 में ‘जब जब फूल खिले’ का रीमेक ‘राजा हिंदुस्तानी’ के नाम से थोड़े बहुत बदलाव के साथ बनाया गया. आमिर खान-करिश्मा कपूर की स्टारर इस मूवी का डायरेक्शन धर्मेश दर्शन ने किया था. अली मोरानी, करीम मोरानी और बंटी शर्मा प्रोड्यूसर थे स्टोरी धर्मेश दर्शन ने, स्क्रीनप्ले रॉबिन भट्ट और डायलॉग जावेद सिद्दीकी ने लिखे थे. यह भी दिलचस्प संयोग है कि ‘जब जब फूल खिले’ में शशि कपूर हीरो थे तो ‘राजा हिंदुस्तानी’ में कपूर खानदान की करिश्मा कपूर हीरोइन थीं.
राजा हिंदुस्तानी का म्यूजिक नदीम-श्रवण ने कंपोज किया था. गीतकार समीर थे. म्यूजिक ब्लॉकबस्टर रहा था. फिल्म में 51 मिनट की लंबाई के 8 गाने रखे गए थे. मूवी को 5 फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले थे. फिल्म का सबसे सुपरहिट गाना ‘परदेसी परदेसी जाना नहीं’ था. फिल्म में इस गाने के कई वर्जन सुनाई देते हैं. इस गाने को कुल 6 सिंगर्स ने अपनी आवाज दी थी. करीब 6 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 76 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक ऑल टाइब ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी. 1996 में सबसे ज्यादा पैसे कमाने की लिस्ट में पहले नंबर पर थी. राजा हिंदुस्तानी के लिए आमिर खान को पहली बार बेस्ट एक्टर का फिल्म फेयर अवॉर्ड भी मिला था.


